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पहचान का खेल वां1एपिसोड

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पहचान का खेल

नायक देश के सबसे अमीर आदमी का बेटा है, लेकिन उसने अपनी पहचान छुपाकर अपनी प्रेमिका के साथ ज़ीरो से शुरुआत की और उसकी कंपनी को शेयर मार्केट तक पहुँचाया। लेकिन कामयाबी मिलते ही प्रेमिका का मन बदल गया। उसे नायक की "गरीबी" से नफरत होने लगी, उसने उसे धोखा दिया और बेइज़्ज़त करके घर से निकाल दिया। नायक चुपचाप सब सहकर चला गया। लेकिन कहानी का असली मोड़ तब आता है, जब करोड़ों की एक बड़ी बिज़नेस मीटिंग में वह अपनी असली पहचान—अरबपति वारिस के रूप में—सबके सामने ज़ाहिर करता है।
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इस एपिसोड की समीक्षा

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विक्रम की दहाड़

विक्रम की एंट्री देखकर रोंगटे खड़े हो गए। गाड़ियों की लाइन और बॉडीगार्ड्स का झुकना उसकी पावर दिखाता है। पर जब उसने तारा को रोहित के साथ देखा, तो चेहरे का रंग बदल गया। लगता है पुरानी दुश्मनी फिर ताज़ा हो गई है। इस पहचान का खेल में कौन जीतेगा, यह तो वक्त ही बताएगा। विक्रम की आँखों में गुस्सा साफ़ दिख रहा था और माहौल बहुत तनावपूर्ण हो गया था।

तारा और रोहित का राज

तारा और रोहित को एक साथ देखकर हैरानी हुई। रोहित के गले पर निशान देखकर सब कुछ साफ़ हो गया। शायद ये नया रिश्ता विक्रम को बिल्कुल पसंद नहीं आया। तारा की सफेद पोशाक उसकी मासूमियत बता रही थी, पर कहानी में कुछ और ही चल रहा है। पहचान का खेल का ये मोड़ बहुत रोचक है। दोनों के बीच की केमिस्ट्री देखकर लगता है कि आगे बड़ा धमाका होने वाला है जल्द ही।

फ्लैशबैक का असर

आधा घंटा पहले का सीन बहुत खुशमिजाज था। विक्रम और तारा रिबन काट रहे थे, सब तालियां बजा रहे थे। फिर अचानक माहौल इतना तनावपूर्ण कैसे हो गया? शायद कार्यालय का ये सीन कुछ छुपा रहा है। विक्रम की मुस्कान अब गायब हो चुकी है। पहचान का खेल में ये उतार-चढ़ाव देखने लायक है। फ्लैशबैक और वर्तमान का कंट्रास्ट बहुत अच्छे से दिखाया गया है दर्शकों के लिए।

कुर्सी की लड़ाई

संयुक्त नाव समूह की कुर्सी के लिए ये लड़ाई सिर्फ कामकाज नहीं है। विक्रम वापस आ गया है और वो भी पूरे दबदबे के साथ। रोहित को नया उपाध्यक्ष बनाकर तारा ने शायद विक्रम को चुनौती दी है। दोनों के बीच की केमिस्ट्री बहुत जटिल लग रही है। पहचान का खेल का हर एपिसोड सस्पेंस से भरा है। पावर और प्यार के बीच का ये संघर्ष बहुत गहराई से दिखाया गया है वीडियो में।

कर्मचारियों की नज़र

ऑफिस के कर्मचारी भी ये ड्रामा देखकर हैरान हैं। सब चुपचाप खड़े होकर अपने बॉस को घूर रहे हैं। विक्रम की नज़रें सीधे रोहित पर थीं, जैसे वो उसे चुनौती दे रहा हो। तारा के चेहरे पर घबराहट साफ़ दिख रही थी। पहचान का खेल में ये टकराव बहुत बड़ा होने वाला है। भीड़ की प्रतिक्रिया ने सीन को और भी इंटरेस्टिंग बना दिया है पूरी तरह से।

विक्रम का स्टाइल

विक्रम का काला कोट और चश्मा उसकी पर्सनालिटी को बहुत रौबदार बना रहा है। वो जब कार से उतरा, तो लगा कोई राजा आया हो। पर अंदर जाकर उसकी हालत देखकर लगता है कि दिल के मामले में वो कमजोर है। तारा के लिए उसकी फीलिंग्स अभी भी बाकी हैं। पहचान का खेल की ये लेयर बहुत गहरी है। उसकी बॉडी लैंग्वेज से सब कुछ साफ़ पता चल रहा है बिना बोले।

रोहित का अंदाज

रोहित हरे सूट में काफी कॉन्फिडेंट लग रहा था। विक्रम के सामने भी उसने घबराहट नहीं दिखाई। शायद उसे तारा का साथ हासिल है। पर विक्रम जैसा इंसान इतनी आसानी से हार मानने वाला नहीं है। दोनों के बीच की इस खींचतान को देखने में मज़ा आ रहा है। पहचान का खेल का ये ट्रैक बहुत पसंद आया। रोहित का एटीट्यूड भी कम नहीं है विक्रम से किसी भी तरह में।

खामोशी का शोर

शुरुआत में कांच टूटने की आवाज़ ने ही तनाव पैदा कर दिया। ये संकेत था कि आगे कुछ बड़ा होने वाला है। विक्रम और तारा के बीच की खामोशी सबसे ज्यादा शोर मचा रही थी। बिना डायलॉग के ही एक्टर्स ने अपना दर्द बता दिया। पहचान का खेल की ये खामोशी बहुत भारी लग रही थी। दृश्य कथा बहुत मजबूत है इस वीडियो क्लिप के अंदर में।

फूल और आंसू

फूलों का गुलदस्ता और कन्फेटी वाला सीन बहुत खूबसूरत था। लग रहा था कि सब कुछ ठीक है। पर फिर अचानक ये ऑफिस वाला सीन आया और सब बदल गया। शायद ये फूल अब सूख चुके हैं, जैसे उनका रिश्ता। विक्रम की आँखों में वो चमक अब नहीं है। पहचान का खेल में ये बदलाव दिल को छू गया। खुशी से गम तक का सफर बहुत तेजी से दिखाया गया है यहाँ पर।

आगे क्या होगा

आगे क्या होगा ये सोचकर ही उत्सुकता बढ़ रही है। क्या विक्रम वापस तारा को जीत पाएगा? या रोहित इसमें बाजी मार लेगा? कॉर्पोरेट वर्ल्ड में प्यार और पावर का ये मिश्रण बहुत खतरनाक है। हर किरदार अपने मकसद में लगा हुआ है। पहचान का खेल का अगला एपिसोड देखने का इंतज़ार हो रहा है। कहानी का हर पहलू बहुत ही रोमांचक लग रहा है दर्शकों को।