दो रसोइयों का संवाद सुनकर पता चला कि सब कुछ योजनाबद्ध था। वो जानबूझकर खुशबू फैला रहे थे ताकि ग्राहक अंदर आएं। यह रणनीति कमाल की है। (पार्श्व स्वर) गायब महाराज में ऐसे मोड़ आते रहते हैं जो दर्शकों को बांधे रखते हैं। रसोई में कर्मचारियों का उत्साह और आदेशों की बारिश देखकर लगता है कि रेस्तरां सच में लोकप्रिय हो गया।
तीनों दोस्तों के बीच की मित्रता बहुत प्यारी लगती है। एक दूसरे का मजाक उड़ाना और फिर साथ में खाने के लिए दौड़ पड़ना। भूरे कोट वाला व्यक्ति तो जैसे पागल हो गया था खुशबू सूंघकर। (पार्श्व स्वर) गायब महाराज में ऐसे मित्रता के उदाहरण दिखाए गए हैं जो असली लगते हैं। संवाद शैली और भाव-भंगिमा उत्कृष्ट हैं।
जब खाने की खुशबू इतनी तेज हो कि लोग सड़क पर रुक जाएं, तो समझो रसोइये ने कमाल कर दिया। दृश्य में दिखाया गया मिर्च वाला मुर्गा का जिक्र और फिर रसोई में बनता खाना देखकर मुंह में पानी आ गया। (पार्श्व स्वर) गायब महाराज में खाने के दृश्य हमेशा भूख बढ़ा देते हैं। कर्मचारियों के आदेश देने का तरीका बहुत हास्यपूर्ण और यथार्थवादी है।
भूरे कोट वाले व्यक्ति का नाटक देखकर हंसी नहीं रुक रही थी। वो बार-बार पूछ रहा था कि खुशबू कहां से आ रही है। फिर जब पता चला कि होटल से है, तो उसकी खुशी देखने लायक थी। (पार्श्व स्वर) गायब महाराज में हास्य का समय बहुत अच्छा है। रसोइयों का आपस में बात करना और फिर अंदर भागना भी बहुत मजेदार था।
रसोई का दृश्य बहुत ऊर्जावान था। सभी कर्मचारी एक साथ आदेश दे रहे थे और रसोइया शांति से पकवान बना रहा था। यह दृश्य दिखाता है कि अच्छा खाना कैसे भीड़ खींच लाता है। (पार्श्व स्वर) गायब महाराज में ऐसे व्यस्त दृश्य भी बहुत अच्छे से चित्रित किए गए हैं। नीली कमीज़ वाले रसोइये का आत्मविश्वास स्तर उच्च था।