जब काले लेस वाली औरत ने फोन निकालकर लाइव स्ट्रीम शुरू किया, तो माहौल बदल गया। वह चोटिल होने के बावजूद मुस्कुरा रही है, जैसे उसे पता हो कि कैमरा उसके पक्ष में है। सफेद कपड़ों वाली बेचारी तो बस रो रही है, जबकि यह औरत नाटक कर रही है। गलत हाथों में दिल में दिखाया गया यह मीडिया का खेल बहुत ही चौंकाने वाला है, जहां सच और झूठ का फर्क मिट जाता है।
बीच में खड़ी वह बुजुर्ग महिला, जिसके गले में मोती हैं, उसकी आंखों में आंसू और चेहरे पर बेबसी साफ दिख रही है। वह सफेद पोशाक वाली लड़की को बचाने की कोशिश कर रही है, लेकिन गुंडे उसे रोक रहे हैं। यह मां-बेटी का रिश्ता या फिर कोई और कनेक्शन, यह देखकर बहुत दुख हुआ। गलत हाथों में दिल की इस कहानी में परिवार की मजबूरी को बहुत खूबसूरती से दिखाया गया है।
नीली टाई वाला मैनेजर बार-बार कुछ कहने की कोशिश कर रहा है, लेकिन उसकी आवाज दब गई है। उसके चेहरे पर साफ दिख रहा है कि वह डरा हुआ है और कुछ छिपा रहा है। शायद उसे पता है कि असली खेल क्या चल रहा है। गलत हाथों में दिल के इस सीन में उसकी चुप्पी सबसे ज्यादा शोर मचा रही है, जो बताती है कि ताकत के आगे सच कैसे झुक जाता है।
शुरुआत में सफेद कपड़ों वाली लड़की रो रही थी, लेकिन जैसे-जैसे सीन आगे बढ़ा, उसकी आंखों में आंसू सूख गए और गुस्सा दिखने लगा। जब उसे पकड़ा गया, तो उसने पीछे मुड़कर जो देखा, उसमें एक वादा था कि वह चुप नहीं बैठेगी। गलत हाथों में दिल की यह कहानी बताती है कि कैसे एक शिकार शिकारी बनने के लिए तैयार होता है। यह ट्विस्ट बहुत ही शानदार है।
पीछे खड़े लोग, जो सूट-बूट में हैं, बस तमाशबीन बने हुए हैं। कोई आगे नहीं आ रहा मदद के लिए। यह भीड़ की मानसिकता को बहुत अच्छे से दर्शाता है। सब देख रहे हैं, सब जानते हैं, लेकिन कोई कुछ नहीं करता। गलत हाथों में दिल के इस दृश्य में यह सामाजिक सच बहुत कड़वा लगता है, जहां इंसानियत मर चुकी है और सब बस अपने बचने की फिक्र में हैं।