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खदान के दिन वां2एपिसोड

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कथानक सार

अर्णव सिंह ने पश्चिमी खदान के सैकड़ों खनिकों को, जो अभी-अभी सैकड़ों मीटर नीचे से ऊपर आए थे, संग लेकर खदान की लगभग बंद होने वाली दूसरी कैंटीन को लाइन लगाने वाली जगह बना दिया। पर किसे पता था कि यह लालची मालिक राकेश कुमार जब खूब कमा लेता है, तो हम खनिकों की भूख को ही बुरा कहने लगता है...
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पानी की बूंदों में छिपा दर्द

खदान के दिन में जब नायक नल से पानी पीता है, तो उसकी आँखों में जो थकान और संघर्ष दिखता है, वह दिल को छू लेता है। गंदे सिंक और फटे कपड़े उसकी गरीबी की कहानी कहते हैं। यह दृश्य दिखाता है कि कैसे एक साधारण इंसान अपनी किस्मत से लड़ रहा है।

गुस्से की आग

जब नायक दरवाजा तोड़ता है और अंदर घुसता है, तो उसकी आँखों में जो गुस्सा और दृढ़ संकल्प दिखता है, वह रोंगटे खड़े कर देता है। खदान के दिन का यह दृश्य दिखाता है कि कैसे एक शांत इंसान भी जब सीमा पार कर जाता है, तो वह कितना खतरनाक हो सकता है।

पैसे की मोहताजी

नायक के हाथ में पुराने नोट और फटा हुआ कागज देखकर लगता है कि वह कितनी मुश्किलों से गुजर रहा है। खदान के दिन में यह दृश्य दिखाता है कि कैसे पैसे की कमी इंसान को कितना नीचे गिरा सकती है। उसकी आँखों में उम्मीद और निराशा दोनों झलकती हैं।

भीड़ का डर

जब नायक भीड़ के सामने खड़ा होता है और सबकी नजरें उस पर होती हैं, तो उस पल का तनाव बहुत ज्यादा होता है। खदान के दिन में यह दृश्य दिखाता है कि कैसे एक इंसान अकेले पूरे सिस्टम के खिलाफ खड़ा हो सकता है। उसकी आवाज में जो दम है, वह काबिले तारीफ है।

खाने की थाली और संघर्ष

खाने की थाली के सामने खड़ा वह आदमी और नायक की भूखी नजरें, यह दृश्य बहुत कुछ कह जाता है। खदान के दिन में दिखाया गया है कि कैसे एक साधारण भोजन भी कितना महत्वपूर्ण हो सकता है जब इंसान भूखा हो। यह दृश्य दिल को छू लेता है।

हेलमेट वाले मजदूर

पीछे खड़े हेलमेट वाले मजदूर और नायक का सामना, यह दृश्य दिखाता है कि कैसे एक इंसान पूरे समूह का नेतृत्व कर सकता है। खदान के दिन में यह दृश्य बहुत प्रभावशाली है। नायक की आँखों में जो चमक है, वह उसे बाकियों से अलग बनाती है।

दरवाजे का टूटना

जब नायक दरवाजा तोड़ता है, तो वह सिर्फ एक दरवाजा नहीं तोड़ता, बल्कि अपनी सभी बाधाओं को तोड़ता है। खदान के दिन का यह दृश्य बहुत ही शक्तिशाली है। उसकी ताकत और गुस्सा देखकर लगता है कि वह कुछ भी कर सकता है।

आँखों की भाषा

नायक की आँखों में जो दर्द, गुस्सा और उम्मीद दिखती है, वह शब्दों में बयां नहीं की जा सकती। खदान के दिन में हर दृश्य में उसकी आँखें कहानी कहती हैं। यह अभिनेता की काबिलियत है कि वह बिना बोले इतना कुछ कह जाता है।

सफेद कोट वाला आदमी

सफेद कोट पहने वह आदमी और नायक का सामना, यह दृश्य दिखाता है कि कैसे दो अलग-अलग दुनिया के इंसान एक दूसरे के आमने-सामने आते हैं। खदान के दिन में यह टकराव बहुत ही दिलचस्प है। दोनों के चेहरे पर अलग-अलग भावनाएं हैं।

संघर्ष की कहानी

खदान के दिन की पूरी कहानी एक संघर्ष की कहानी है। नायक की गरीबी, उसकी भूख, उसका गुस्सा और उसका संघर्ष, सब कुछ बहुत ही वास्तविक लगता है। यह फिल्म दिखाती है कि कैसे एक साधारण इंसान अपनी किस्मत बदलने की कोशिश करता है।