राजा को अपनी ताकत पर बहुत घमंड था। उसने सोचा था कि कोई उसे हरा नहीं सकता। लेकिन एक चाल, देवता अवस्था में नायक ने उसे हरा दिया। राजा का चेहरा देखकर लगा कि उसका अहंकार चूर-चूर हो गया। यह बदले की आग थी।
जब नायक की आँखें नीली चमकने लगीं, तो समझ गया कि अब वह इंसान नहीं रहा। एक चाल, देवता अवस्था में वह कुछ और ही बन गया था। यह रूपांतरण इतना शक्तिशाली था कि देखकर रोंगटे खड़े हो गए। यह जादू था या शक्ति?
स्टेडियम में बैठी महिलाएं पहले डरी हुई थीं, लेकिन जब नायक ने जीत हासिल की, तो उनकी आँखों में चमक आ गई। एक चाल, देवता अवस्था में वह सबका हीरो बन गया। यह दृश्य इतना भावनात्मक था कि आँखें नम हो गईं।
लड़ाई के बाद नायक थक गया था, लेकिन उसकी आँखों में जीत की चमक थी। एक चाल, देवता अवस्था में उसने सबको दिखा दिया कि हार नहीं माननी चाहिए। यह कहानी उम्मीद और साहस की थी। देखकर दिल खुश हो गया।
राजा ने अपनी शक्ति दिखाई, पानी के विशालकाय दानव को बुलाया। लेकिन नायक ने हार नहीं मानी। एक चाल, देवता अवस्था में वह ऊपर उठा और त्रिशूल से वार किया। यह लड़ाई सिर्फ ताकत की नहीं, इरादों की थी। हर फ्रेम में तनाव था, और अंत में जीत की खुशी।