मेरा निर्वासित अल्फा सौतेला पिता की शुरुआत ही इतनी रहस्यमयी है कि रूह कांप जाए। बर्फ़ से ढके जंगल में मशालों की रोशनी और वो तीन पात्र... खासकर वो महिला जिसके कंधों पर भेड़िए के निशान हैं, लगता है कोई जादूगरनी है। बच्ची का डर और माँ का संघर्ष दिल को छू गया। नेटशॉर्ट पर देखते वक्त लगा जैसे मैं भी उस झोपड़ी में छिपी हूँ।
जिस पल उस युवक ने बर्फ़ पर पंजा देखा, मेरी सांसें रुक गईं। मेरा निर्वासित अल्फा सौतेला पिता में ये डिटेलिंग कमाल की है। वो बुजुर्ग आदमी जो लाठी टेकता है और वो युवक जिसके कपड़ों पर भेड़िया बना है, लगता है ये कोई प्राचीन कुल है। झोपड़ी में माँ-बेटी का डर असली लगता है। नेटशॉर्ट की क्वालिटी देखकर हैरान रह गया।
बच्ची की वो डरी हुई आँखें और माँ का उसे गले लगाना... मेरा निर्वासित अल्फा सौतेला पिता ने बिना डायलॉग के ही इमोशनल कर दिया। बाहर वो भयानक समूह और अंदर ये मासूमियत। वो महिला जो लाठी लेकर घुसी, उसकी आँखों में कठोरता थी। नेटशॉर्ट ऐप पर ऐसे सीन देखकर लगता है जैसे खुद उस कमरे में हूँ।
जंगल में वो नीली रोशनी वाले खंभे और उन पर बने चेहरे... मेरा निर्वासित अल्फा सौतेला पिता का सेट डिज़ाइन जादुई है। लगता है ये कोई प्राचीन मंदिर का रास्ता है। वो समूह जब आगे बढ़ता है तो लगता है युद्ध शुरू होने वाला है। झोपड़ी का दृश्य और बाहर का ठंडा माहौल बिल्कुल कंट्रास्ट है। नेटशॉर्ट पर देखना बन गया आदत।
उस महिला के हाथ में जो लाठी है, वो साधारण नहीं लगती। मेरा निर्वासित अल्फा सौतेला पिता में हर चीज़ में कोई न कोई जादू छिपा है। जब वो झोपड़ी में घुसती है तो लगता है अब कुछ बड़ा होने वाला है। माँ और बच्ची का डर साफ़ दिख रहा है। नेटशॉर्ट पर ऐसे सीन देखकर लगता है जैसे मैं भी उस कहानी का हिस्सा हूँ।
बर्फ़ पर वो पैरों के निशान और फिर भेड़िए का पंजा... मेरा निर्वासित अल्फा सौतेला पिता में ये डिटेलिंग कमाल की है। लगता है कोई जानवर नहीं, इंसान ही ये सब कर रहा है। वो युवक जो मुस्कुराता है, उसकी आँखों में कुछ छिपा है। झोपड़ी का दृश्य और बाहर का ठंडा माहौल बिल्कुल अलग है। नेटशॉर्ट की क्वालिटी देखकर हैरान रह गया।
झोपड़ी के अंदर का अंधेरा और बाहर की नीली रोशनी... मेरा निर्वासित अल्फा सौतेला पिता का माहौल इतना डरावना है कि रूह कांप जाए। माँ का बच्ची को गले लगाना और फिर दरवाज़े पर दस्तक... लगता है अब कुछ बड़ा होने वाला है। नेटशॉर्ट पर देखते वक्त लगा जैसे मैं भी उस झोपड़ी में छिपी हूँ।
उस युवक के कपड़ों पर भेड़िए का निशान और उस महिला के कंधों पर भी वही निशान... मेरा निर्वासित अल्फा सौतेला पिता में ये सिंबलिज़म कमाल का है। लगता है ये कोई प्राचीन कुल है जो भेड़ियों से जुड़ा है। बच्ची का डर और माँ का संघर्ष दिल को छू गया। नेटशॉर्ट पर ऐसे सीन देखकर लगता है जैसे मैं भी उस कहानी का हिस्सा हूँ।
मशालों की रोशनी में वो समूह और उनके चेहरे... मेरा निर्वासित अल्फा सौतेला पिता की शुरुआत ही इतनी रहस्यमयी है। लगता है ये कोई प्राचीन अनुष्ठान है। झोपड़ी में माँ-बेटी का डर असली लगता है। नेटशॉर्ट ऐप पर देखते वक्त लगा जैसे मैं भी उस जंगल में खड़ी हूँ और ये सब देख रही हूँ।
बच्ची की मासूमियत और बाहर का वो डरावना माहौल... मेरा निर्वासित अल्फा सौतेला पिता ने बिना डायलॉग के ही इमोशनल कर दिया। वो महिला जो लाठी लेकर घुसी, उसकी आँखों में कठोरता थी। माँ का बच्ची को गले लगाना और फिर दरवाज़े पर दस्तक... लगता है अब कुछ बड़ा होने वाला है। नेटशॉर्ट पर देखना बन गया आदत।
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