जब क्लॉस ने उस लड़के को इंटरोगेशन रूम में रखा, तो माहौल में तनाव साफ दिख रहा था। जख्मी चेहरा और आँखों में डर, सब कुछ बता रहा था कि ये मामला साधारण नहीं है। जासूस आशिक की शुरुआत ही इतनी इंटेंस है कि साँस रुक जाए। क्लॉस की आँखों में गुस्सा और कुछ और भी था, जो समझना मुश्किल है।
क्लॉस के डेस्क से वो पुराना डिब्बा और अंदर छुपा क्रॉस... ये सिर्फ कोई एक्सेसरी नहीं लग रही। शायद ये उसके और उस लड़के के बीच के रिश्ते की कुंजी है। जासूस आशिक में हर चीज़ के पीछे एक गहरी वजह है। जब उसने क्रॉस को चूमा, तो लगा जैसे कोई पुरानी याद ताज़ा हो गई हो।
लड़का कार में अकेला बैठा था, चेहरे पर जख्म और आँखों में सवाल। बाहर बारिश और अंदर तूफान। उसकी गर्दन में 'टॉल' लिखा पेंडेंट किसी और की निशानी लग रहा था। जासूस आशिक का ये सीन दिल को छू गया। वो किसको याद कर रहा था? शायद अपने बचपन के दोस्त को।
जब फ्लैशबैक में वो स्कूल का मैदान दिखा, जहाँ बच्चे एक दूसरे को मार रहे थे, तो दिल दहल गया। उस लड़के को अकेला छोड़ दिया गया, तब एक दूसरे लड़के ने उसका हाथ थामा। जासूस आशिक ने बचपन के उस दर्द को बहुत खूबसूरती से दिखाया है। दोस्ती की शुरुआत वहीं से हुई थी।
वो बड़ा सा इमारत जो अनाथालय था, अब आग में जल रहा था। एक आदमी कार में बैठकर चला गया और पीछे छोड़ गया एक रोता हुआ बच्चा। जासूस आशिक का ये सीन सबसे ज्यादा इमोशनल था। उस बच्चे की चीखें आज भी गूँज रही हैं। शायद यहीं से बदलाव की शुरुआत हुई।
एक पुलिस वाला बना और दूसरा अपराधी? या शायद दोनों की कहानी कुछ और ही है। बचपन में एक दूसरे को क्रॉस और पेंडेंट देकर वादा किया था, पर ज़िंदगी ने अलग रास्ते दिखा दिए। जासूस आशिक में ये ट्विस्ट बहुत ही शानदार है। क्लॉस और वो लड़का, दोनों के बीच क्या हुआ था?
जब क्लॉस अकेले अपने ऑफिस में बैठा था, तो उसकी आँखों में एक अजीब सा दर्द था। शायद वो उस लड़के को छोड़ना नहीं चाहता था, पर मजबूरी थी। जासूस आशिक में क्लॉस का किरदार बहुत गहरा है। उसने क्रॉस को मुट्ठी में भींच लिया, जैसे किसी को खोने का डर हो।
उस लड़के के गले में 'टॉल' लिखा पेंडेंट था, जो शायद उसके दोस्त की निशानी थी। बचपन में दिया गया तोहफा आज भी उसके पास है। जासूस आशिक में हर डिटेल मायने रखती है। शायद 'टॉल' किसी नाम का शॉर्ट फॉर्म है, या कोई पुराना वादा जो आज भी ज़िंदा है।
अनाथालय की आग ने सब कुछ जला दिया, पर सच नहीं जला। वो आदमी जो कार में बैठा, शायद उस आग का जिम्मेदार था। जासूस आशिक का ये सीन बहुत ही ड्रामेटिक था। उस बच्चे की आँखों में आग और दिल में नफरत साफ दिख रही थी। अब वो बदला लेने वाला है।
इंटरोगेशन रूम में क्लॉस और उस लड़के के बीच जो केमिस्ट्री थी, वो सिर्फ दुश्मनी नहीं थी। एक किस और हथकड़ियाँ, सब कुछ बहुत इंटेंस था। जासूस आशिक ने इस रिश्ते को बहुत ही बारीकी से दिखाया है। क्या ये प्यार है या नफरत? या फिर दोनों का मिश्रण?
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