शुरुआत में ही खून की दो बूंदों से जो जादुई प्रतीक बना, वो रोंगटे खड़े कर देने वाला था। एल्ड्रा और उस साथी के बीच का वो पल सिर्फ एक अनुष्ठान नहीं, बल्कि एक गहरे विश्वास की शुरुआत लग रहा था। अब ट्रैश नहीं: ओरेकल जाग उठा में ऐसे दृश्य देखकर लगता है कि कहानी में अब कुछ बड़ा होने वाला है। जादू और भावनाओं का यह मिश्रण बेहतरीन है।
वह बूढ़ी महिला जो भीड़ के सामने खड़ी होकर चिल्लाती है, उसकी आँखों में एक अजीब सी चमक है। लगता है जैसे वह किसी पुरानी भविष्यवाणी को सच कर रही हो। अब ट्रैश नहीं: ओरेकल जाग उठा के इस मोड़ पर कहानी में एक नया रहस्य जुड़ गया है। उसका वह खंजर और भीड़ का उत्साह देखकर लगता है कि अब युद्ध की घंटियाँ बजने वाली हैं।
जब वह छोटी बच्ची अपने पिता का हाथ थामे चलती है, तो सीन में एक अलग ही नरमी आ जाती है। एल्ड्रा का उसे घोड़े पर बिठाना और वह मासूम सा चेहरा देखकर दिल पिघल जाता है। अब ट्रैश नहीं: ओरेकल जाग उठा में ऐसे पल दिखाकर निर्माताओं ने भावनात्मक गहराई को बहुत अच्छे से पकड़ा है। यह दृश्य सबसे यादगार लगा।
जब कैमरा ऊपर से उस विशाल बर्फ़ीले किले को दिखाता है, तो नज़ारा सच में मनमोहक है। बादलों के बीच छिपा वह किला किसी परीकथा जैसा लग रहा था। अब ट्रैश नहीं: ओरेकल जाग उठा के सेट डिज़ाइन और विजुअल्स पर काफी मेहनत की गई है। ऐसे दृश्य देखकर लगता है कि हम किसी दूसरी ही दुनिया में खो गए हैं।
वह भेड़िया जिसके शरीर पर सुनहरी चमक थी, जब दहाड़ता है तो डर के मारे रूह कांप जाती है। बूढ़े व्यक्ति का उसे सहलाना और फिर उसका हमलावर रूप देखकर लगता है कि यह कोई साधारण जानवर नहीं है। अब ट्रैश नहीं: ओरेकल जाग उठा में इस जादुई प्राणी का इस्तेमाल कहानी को एक नया मोड़ दे रहा है।
एल्ड्रा का वह पल जब वह छोटी बच्ची के सिर पर हाथ रखती है और मुस्कुराती है, तो उसकी सख्त योद्धा छवि के पीछे छिपी नरमी झलकती है। अब ट्रैश नहीं: ओरेकल जाग उठा में किरदारों के इस पहलू को दिखाना बहुत अच्छा लगा। यह दिखाता है कि युद्ध के बीच भी इंसानियत जिंदा है।
जब एल्ड्रा घोड़े पर सवार होकर जाती है और वह साथी उसे देखता रहता है, तो उसकी आँखों में एक अजीब सी उदासी थी। शायद वह जानता था कि यह आखिरी मुलाकात हो सकती है। अब ट्रैश नहीं: ओरेकल जाग उठा में ऐसे भावनात्मक विदाई दृश्य दर्शकों को बांधे रखते हैं।
वह छोटी बच्ची जब बूढ़े व्यक्ति के पास जाती है और उसे गले लगाती है, तो उसकी मासूमियत सबका दिल जीत लेती है। उसकी नीली आँखें और सफेद बाल उसे किसी देवदूत जैसा बनाते हैं। अब ट्रैश नहीं: ओरेकल जाग उठा में इस किरदार ने सबसे ज्यादा ध्यान खींचा है।
जब पूरी भीड़ घुटनों के बल बैठ जाती है और उस बूढ़ी महिला का सम्मान करती है, तो उस पल में एक अलग ही ऊर्जा थी। यह दिखाता है कि लोग किस कदर अपनी परंपराओं और नेताओं से जुड़े हुए हैं। अब ट्रैश नहीं: ओरेकल जाग उठा में ऐसे सामूहिक दृश्य कहानी की गहराई को बढ़ाते हैं।
अंत में जब भेड़िया हमला करता है और सबकी आँखों में डर है, तो कहानी एक ऐसे मोड़ पर रुकती है जहाँ से आगे क्या होगा, यह जानने की उत्सुकता बढ़ जाती है। अब ट्रैश नहीं: ओरेकल जाग उठा का यह क्लिफहैंगर अगले एपिसोड के लिए बेताब कर देता है।
इस एपिसोड की समीक्षा
नवीनतम