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परित्यक्त

गुप्ता परिवार का पुत्र आरव सुखी जीवन जी रहा था। विहान ने झूठी डीएनए रिपोर्ट लाकर उसका जीवन तोड़ा, फिर फर्जी दुर्घटना करके स्वयं को आरव से अंधा होने का नाटक किया। परिवार ने आरव पर विश्वास न करके उसे जेल भेज दिया। पाँच साल बाद छूटने पर आरव ने देखा कि उसकी प्रेमिका सुहानी विहान का बच्चा धारण कर रही है, और परिवार अब भी विहान पर विश्वास करता है। हताश आरव ने सब संबंध तोड़ने का फैसला किया, लेकिन इसी दौरान उसने विहान की साजिश उजागर कर दी। तीन साल बाद आरव गौरव के साथ लौटा और सारी सच्चाई सबके सामने आ गई।
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इस एपिसोड की समीक्षा

घर का माहौल तनावपूर्ण

इस दृश्य में भावनात्मक तनाव बहुत गहरा है। युवक की आँखों में डर और विनती साफ़ झलक रही है, जबकि बुजुर्ग व्यक्ति का गुस्सा कमरे के तापमान को बढ़ा रहा है। परित्यक्त शीर्षक इस कहानी के दर्द को बयां करता है। महिला की चुप्पी और सख्त चेहरा बताता है कि यहाँ शब्दों से ज्यादा खामोशी भारी है। नेटशॉर्ट ऐप पर ऐसे ड्रामे देखना रोंगटे खड़े कर देता है।