जतिन रॉय ने जब कहा कि वह शाही रसोइए जय रॉय का शिष्य है, तो सबकी आंखें फटी रह गईं। उसका आत्मविश्वास देखकर लगता है कि वह वाकई कुछ खास है। लेकिन क्या वह इतनी बड़ी चुनौती को स्वीकार कर पाएगा? शेफ एसोसिएशन का पूरा साथ मिलना एक बड़ी बात है, पर हार की कीमत बहुत भारी है।
विक्रम सिंह को खुश करना ही सब कुछ है। जो भी यह जानलेवा चुनौती जीतेगा, बसंत बिहार उसी का होगा। यह शर्त इतनी कठिन क्यों है? शायद इसमें कोई गहरा राज छिपा है। राजेश शर्मा ने फंसाया है, पर जतिन रॉय पीछे हटने वाला नहीं लग रहा।
पहला राउंड बेसिक स्किल्स का है, खासकर कटाई का। जतिन रॉय ने मुंह में मिर्च रखकर अपनी तैयारी दिखा दी। यह सिर्फ चाकू चलाने की बात नहीं, बल्कि नर्वस कंट्रोल की परीक्षा है। अगर वह इसमें फेल हुआ, तो उसका करियर खत्म। डबिंग गायब महाराज का यह एपिसोड दिल की धड़कनें तेज कर देता है।
अगर चुनौती में कामयाब हो गए, तो बसंत बिहार बच जाएगा। लेकिन हारने पर होटल बंद हो जाएगा और जतिन रॉय कभी खाना नहीं बना पाएंगे। यह जोखिम बहुत बड़ा है। फिर भी, वह चुनौती स्वीकार कर रहा है। क्या उसके पास कोई गुप्त हथियार है?
जतिन रॉय ने खुद को शाही रसोइए जय रॉय का शिष्य बताया। यह सुनकर सब हैरान रह गए। क्या वह वाकई उस महान शेफ का छात्र है? अगर हां, तो उसकी कला देखने लायक होगी। लेकिन क्या वह अपने गुरु की विरासत को बचा पाएगा?