सीन बदलते ही कहानी में एक नया मोड़ आता है। सात दिन बाद वो शख्स इतना बुरा हाल हो गया है कि पहचाना नहीं जा रहा। कपड़े फटे हुए और चेहरे पर चोट के निशान। दुकानदारों का व्यवहार बहुत क्रूर लगा, लेकिन असली दर्द तो तब हुआ जब एक बुजुर्ग ने उसे खाना दिया। (डबिंग) गायब महाराज की तलाश में यह किरदार कहाँ फंस गया?
जब सबने उस बेचारे को भगा दिया, तब उस दुकान मालिक ने जो किया वो दिल को छू गया। उसने देखा कि लड़का भूखा है और उसे समोसा दिया। लड़के ने गिरा दिया लेकिन उस आदमी का गुस्सा नहीं, बल्कि चिंता दिखी। (डबिंग) गायब महाराज के इस ड्रामे में यह छोटा सा इंसानियत वाला सीन सबसे बेस्ट था।
पहले हिस्से में जब सब लोग महाराज को ढूंढ रहे थे, तो उनकी आँखों में डर साफ दिख रहा था। व्हाइट सूट वाला शख्स और बाकी सब कन्फ्यूज्ड हैं। जमीन खोदने की बात तक कर दी उन्होंने। (डबिंग) गायब महाराज की गायबगी ने सबकी नींदें उड़ा दी हैं। यह एक्टिंग और डायलॉग डिलीवरी बहुत नेचुरल लगी।
वो सीन जब लड़के ने समोसा गिरा दिया और वो जमीन पर गिर गया, मेरा दिल बैठ गया। उसकी हालत इतनी खराब है कि वो खाना भी नहीं संभाल पा रहा। दुकान मालिक का रिएक्शन देखकर लगा कि वो सच में परेशान है। (डबिंग) गायब महाराज की इस सीरीज में इमोशनल एंगल बहुत स्ट्रॉन्ग है।
क्या वो लड़का जो अब भीख मांग रहा है, वही महाराज है जो पहले गायब हुआ था? उसके कपड़े और हालत देखकर यही शक होता है। सात दिन में इतना बड़ा बदलाव कैसे आया? (डबिंग) गायब महाराज की पहेली सुलझती जा रही है लेकिन सवाल और बढ़ रहे हैं। यह ट्विस्ट बहुत शानदार है।