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गलत हाथों में दिलवां55एपिसोड

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गलत हाथों में दिल

सिमरन अपनी सास सुमन को उनके बेटे रजत के नए हाई-एंड बार में ले गई। वहाँ उसे पता चला कि रजत का प्रिया के साथ अफेयर है। प्रिया ने सिमरन और सुमन को सरेआम अपमानित किया, उन पर शराब डाली और सुरक्षाकर्मियों से उन्हें रोकवाया। प्रिया ने सिमरन की घड़ी भी पहन रखी थी, जो रजत को देखभाल के लिए दी गई थी। रजत ने फोन पर सिमरन की चोट को नज़रअंदाज़ किया, लेकिन प्रिया की मदद के लिए तुरंत पहुंचा। विहान ने सिमरन की मदद की। सिमरन ने रजत से तलाक ले लिया और अपने डिज़ाइन करियर पर ध्यान दिया। एक साल बाद उसे अंतरराष्ट्रीय
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इस एपिसोड की समीक्षा

काले लेस का जहर

काले लेस की पोशाक पहनी महिला का हर एक्सप्रेशन जैसे जहर उगल रहा हो। वह जिस अंदाज में अपनी बाहें बांधकर खड़ी है, उसमें एक अजीब सी घमंड और डर का मिश्रण है। गलत हाथों में दिल सीरीज का यह सीन बताता है कि असली दुश्मनी शब्दों में नहीं, बल्कि नजरों में होती है। पृष्ठभूमि में खड़े पुरुष पात्रों की चुप्पी इस तनाव को और भी गहरा बना रही है।

मीडिया की भीड़ और सच्चाई

जब मीडिया की भीड़ इकट्ठी हो जाती है, तो सच्चाई अक्सर दब जाती है, लेकिन यहाँ नायिका की खामोशी सबसे बड़ा शोर बन गई है। गलत हाथों में दिल के इस सीन में दिखाया गया है कि कैसे एक प्रेस कॉन्फ्रेंस निजी बदले का मैदान बन सकता है। कैमरों की फ्लैश लाइट्स के बीच चेहरों के रंग बदलना एक मास्टरपीस सिनेमेटोग्राफी है जो दर्शक को बांधे रखती है।

आंखों की जंग

दो महिलाओं के बीच होने वाली यह आंखों की जंग किसी एक्शन सीन से कम नहीं है। सफेद पोशाक वाली नायिका का धैर्य और काले कपड़ों वाली खलनायिका की बेचैनी साफ दिख रही है। गलत हाथों में दिल की कहानी में यह मोड़ बहुत महत्वपूर्ण है जहां बिना एक शब्द बोले सब कुछ कह दिया गया है। नेटशॉर्ट पर ऐसे ही इंटेंस सीन्स देखना मेरी पसंदीदा आदत बन गई है।

तनाव का माहौल

लॉबी का वह विशाल हॉल अब एक अदालत जैसा लग रहा है जहां फैसला नजरों से सुनाया जा रहा है। गलत हाथों में दिल के इस एपिसोड में टेंशन लेवल पीक पर है। पीछे खड़े पुरुष पात्रों की चिंतित शक्लें बता रही हैं कि आने वाला वक्त आसान नहीं होने वाला। यह दृश्य साबित करता है कि अच्छी एक्टिंग के लिए जोर-जोर से चिल्लाना जरूरी नहीं है।

खामोश चीखें

कभी-कभी खामोशी सबसे तेज चीख होती है, और यह सीन उसका जीता जागता उदाहरण है। नायिका के चेहरे पर कोई शिकन नहीं, लेकिन उसकी आंखें सब कुछ बयां कर रही हैं। गलत हाथों में दिल की यह कहानी दर्शाती है कि कैसे रिश्तों में दरारें पब्लिक प्लेस पर भी सामने आ सकती हैं। रिपोर्टर्स के माइक जैसे हथियार बन गए हैं इस भावनात्मक युद्ध में।

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