जब वह चश्मे वाला शख्स गुस्से में चिल्लाता है, तो कमरे की हवा थम सी जाती है। नीले वेस्ट कोट वाली शख्सियत का गुस्सा सिर्फ आवाज में नहीं, उसकी आंखों की नफरत में साफ दिख रहा है। पीछे खड़े युवक की चुप्पी सबसे ज्यादा शोर मचा रही है। गलत हाथों में दिल की यह कहानी बताती है कि कैसे रिश्तों के कांच टूटते हैं और फिर कभी जुड़ते नहीं।
इस झगड़े में सबसे दिलचस्प बात वह खामोशी है जो बीच-बीच में आती है। सफेद स्वेटर वाला लड़का कुछ बोलना चाहता है पर रुक जाता है, शायद उसे पता है कि अब शब्द बेकार हैं। काले कपड़ों वाली जोड़ी की बॉडी लैंग्वेज बता रही है कि वे इस नाटक के मास्टरमाइंड हैं। गलत हाथों में दिल देखकर लगता है कि इंसान के चेहरे कितने मुखौटे पहन सकते हैं।
चश्मे वाले शख्स का गुस्सा देखकर लगता है जैसे ज्वालामुखी फट पड़ा हो। उसका हर इशारा, हर शब्द जहर उगल रहा है। लेकिन सफेद ब्लॉउज वाली लड़की की आंखों में डर नहीं, एक अजीब सी जिद्द है। शायद वह हार मानने वाली नहीं है। गलत हाथों में दिल की यह लड़ाई सिर्फ दो लोगों की नहीं, बल्कि दो दुनियाओं की टक्कर लगती है।
काले लेस वाले कपड़ों में वह महिला जब मुस्कुराती है, तो रोंगटे खड़े हो जाते हैं। उसकी मुस्कान में जीत का घमंड है, जैसे उसने कोई बड़ा दांव खेल लिया हो। पीछे खड़ा लड़का बस तमाशबीन बना हुआ है, शायद वह भी इस साजिश का हिस्सा है। गलत हाथों में दिल की कहानी में हर किरदार के अपने राज हैं जो धीरे-धीरे खुल रहे हैं।
सफेद कपड़ों वाली लड़की की आंखों में जो नमी है, वह दिल को चीर जाती है। वह रो नहीं रही, पर उसकी आंखें सब कुछ कह रही हैं। सामने खड़ा चश्मे वाला शख्स शायद कभी उससे प्यार करता था, आज वही प्यार नफरत बन चुका है। गलत हाथों में दिल की यह कहानी बताती है कि प्यार और नफरत की लकीर कितनी पतली होती है।