
अंत में वह हरा पत्थर या ब्रूच जिसके लिए सब कुछ हुआ, वह एक हाथ से दूसरे हाथ में गया। खून नहीं, वो मेरा क्राउन का यह अंत बहुत प्रतीकात्मक था। लगता है असली ताकत तलवार में नहीं, उस पत्थर में है। कहानी का यह ट्विस्ट बहुत ही शानदार था और आगे की कहानी के लिए उत्सुक बढ़ा गया।
सबसे ज्यादा असर उस छोटे राजकुमार के चेहरे का हुआ। खून नहीं, वो मेरा क्राउन में उसकी मासूमियत और आंखों में छपा डर दिल दहला देने वाला था। वह सब देख रहा था लेकिन कर कुछ नहीं सकता था। बच्चों को ऐसे माहौल में देखना सबसे दर्दनाक होता है। नेटशॉर्ट पर इमोशनल सीन्स बहुत गहराई से दिखाए गए हैं।
फर्श पर पड़े शव और दीवारों से टकराती चीखें... खून नहीं, वो मेरा क्राउन ने दिखाया कि सत्ता पाने के लिए कितनी कीमत चुकानी पड़ती है। रानी का हंसना और फिर अचानक गिर जाना, यह सब इतना तेजी से हुआ कि सांस रुक गई। नेटशॉर्ट की स्टोरीटेलिंग कमाल की है, हर सेकंड सस्पेंस से भरा हुआ।
जिस युवक को रानी ने गले पर तलवार रखी थी, उसकी चीखें आज भी कानों में गूंज रही हैं। खून नहीं, वो मेरा क्राउन में धोखे और बदले की आग बहुत तेजी से फैली। एक पल में सब कुछ बदल गया। यह शो बताता है कि महलों की दीवारें कितनी खूनी साजिशें छिपाए रखती हैं।
दरवाजा खुला और राजा की एंट्री हुई, लेकिन कमरे में मौत का सन्नाटा था। खून नहीं, वो मेरा क्राउन में यह दृश्य बहुत भारी था। राजा के चेहरे पर हैरानी और रानी पर गुस्सा साफ दिख रहा था। जब सत्ता के बीच प्रेम आ जाता है, तो फिर वहां बस तबाही बचती है।
अंत में जब महिला अकेले महल से बाहर निकली और सूरज ढल रहा था, तो लगा जैसे एक युग का अंत हो गया हो। खून नहीं, वो मेरा क्राउन का आखिरी शॉट बहुत खूबसूरत और उदास था। उसने सब कुछ हासिल किया लेकिन शायद सब कुछ खो भी दिया। नेटशॉर्ट पर विजुअल्स भी कमाल के हैं।
शीर्षक ही सब कहता है, खून नहीं, वो मेरा क्राउन। लोगों ने सोचा यह खून का खेल है, लेकिन असल में यह ताज के लिए पागलपन है। रानी का पागल होकर हंसना और फिर चीखना, यह दिखाता है कि सत्ता इंसान को अंदर से कैसे खा जाती है। यह शो देखकर सोचने पर मजबूर कर देता है।
खून नहीं, वो मेरा क्राउन में सत्ता का खेल कितना खूनी हो सकता है, यह दृश्य देखकर रोंगटे खड़े हो गए। रानी का वह ठंडा चेहरा जब वह तलवार चलाती है, और सामने खड़ी महिला की आंखों में बच्चे के लिए डर... यह सिर्फ एक लड़ाई नहीं, दो मांओं के बीच का युद्ध है। नेटशॉर्ट पर ऐसे इंटेंस सीन्स देखना एक अलग ही अनुभव है।
जब नीली पोशाक वाली महिला ने जमीन से खंजर उठाया, तो लगा जैसे पूरा कमरा थम गया हो। खून नहीं, वो मेरा क्राउन का यह मोड़ सबसे बेहतरीन था। उसकी आंखों में आंसू थे लेकिन इरादों में जंग। बच्चे को बचाने के लिए वह किसी भी हद तक जा सकती है, यह जज्बात हर मां समझ सकती है।
एक रानी जिसके पास ताज है और दूसरी जिसके पास मां का गुस्सा। खून नहीं, वो मेरा क्राउन में इन दोनों के बीच का संघर्ष देखने लायक था। जब नीली पोशाक वाली महिला ने तलवार उठाई, तो लगा कि अब असली लड़ाई शुरू हुई है। नेटशॉर्ट पर ऐसे ड्रामेटिक सीन्स देखना बहुत रोमांचक है।


इस एपिसोड की समीक्षा