शुरुआत में लगा कि यह कोई गंभीर क्राइम थ्रिलर है, लेकिन जैसे ही पता चला कि बिस्तर पर खून की जगह सिर्फ पीरियड्स का निशान था, हंसी नहीं रुक रही थी। उस आदमी का रोना और फिर गुस्सा होना बहुत ओवरएक्टिंग लग रहा था, जैसे उसने कोई बड़ा अपराध कर दिया हो। रंगे हाथ पकड़ा गया सीन में जब वह औरत उसे समझाने की कोशिश करती है, तो लगता है कि रिश्तों में कितनी गलतफहमियां हो सकती हैं। अंत में जब वह नए कपड़ों में बाहर जाता है और पड़ोसियों से मिलता है, तो सब कुछ सामान्य लगता है, बस एक छोटी सी गलती ने पूरा माहौल खराब कर दिया था।