राख से वापसी की शुरुआत ही इतनी दमदार है कि सांस रुक जाए। वीरान शहर, ज़ोंबी का खौफ और फिर हीरो की एंट्री। हर फ्रेम में तबाही का मंज़र इतना असली लगता है कि लगता है मैं भी वहीं खड़ा हूं। एक्शन और इमोशन का बैलेंस कमाल का है।
फ्यूचरिस्टिक सूट में हीरोइन का लुक और उसका संघर्ष देखकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं। राख से वापसी में उसकी ताकत और कमज़ोरी दोनों को बहुत खूबसूरती से दिखाया गया है। जब वो घायल होकर भी लड़ती है, तो दिल धक से रह जाता है।
इतनी बर्बादी के बीच हीरो और हीरोइन का प्यार देखकर आंखें नम हो गईं। राख से वापसी ने साबित कर दिया कि इंसानियत कभी नहीं मरती। उनका वो किस सीन और फिर बिछड़ना, दिल को चीर गया। सच्चा प्यार हर हाल में जीतता है।
जब हीरोइन जेल में बच्चे को जन्म देती है, तो लगता है कि अंधेरे में एक किरण जगी है। राख से वापसी का ये मोड़ सबसे इमोशनल है। उस बच्चे की मासूमियत और मां का संघर्ष देखकर कोई भी भावुक हो जाएगा। उम्मीद की नई किरण।
गुंडे का किरदार इतना खौफनाक है कि नफरत भी होती है और डर भी। राख से वापसी में उसकी क्रूरता को बहुत बारीकी से दिखाया गया है। जब वो हीरोइन को तंग करता है, तो गुस्सा आता है कि काश मैं भी वहीं होता।
टाइम जंप के बाद का सीन देखकर हैरानी हुई। बच्चा अब बड़ा हो गया है और वो भी कुछ खास है। राख से वापसी की कहानी में ये ट्विस्ट बहुत जरूरी था। अब लगता है कि असली लड़ाई तो अब शुरू होगी।
जब हीरो वापस आता है, तो उसकी आंखों में नीली चमक और हाथ में भविष्य का हथियार। राख से वापसी का ये सीन सिनेमाई इतिहास में याद रखे जाने लायक है। उसका गुस्सा और बदले की आग, सब कुछ परफेक्ट है।
ज़ोंबी के साथ लड़ाई के सीन्स इतने इंटेंस हैं कि पलकें झपकाने का मन नहीं करता। राख से वापसी में एक्शन कोरियोग्राफी शानदार है। हीरो का एक-एक शॉट दुश्मनों को धराशायी करता है, मज़ा आ गया।
नेटशॉर्ट ऐप पर राख से वापसी देखना एक अलग ही अनुभव है। क्वालिटी और स्टोरीटेलिंग इतनी बेहतरीन है कि बड़ी फिल्मों को भी टक्कर दे। हर एपिसोड के बाद अगला एपिसोड देखने की बेचैनी होती है।
हीरो और हीरोइन का फिर से मिलना और उनकी आंखों में वही पुराना प्यार। राख से वापसी ने दिखाया कि दूरियां सिर्फ शरीर की होती हैं, दिल की नहीं। अब वो साथ मिलकर दुनिया को बचाएंगे, ये उम्मीद बाकी है।
इस एपिसोड की समीक्षा
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