बूढ़े आदमी की आँखों में वो गहराई है जो सिर्फ न्याय का भार में ही देखने को मिलती है। फोन रखते ही उसकी मुस्कान गायब हो गई, जैसे कोई भारी बोझ कंधों पर आ गया हो। कमरे की खामोशी और किताबों की महक ने माहौल को और भी रहस्यमयी बना दिया।
जब माँ ने गुस्से में आकर कहा, तो लगा जैसे घर की दीवारें कांप उठी हों। न्याय का भार का ये सीन दिल को छू गया। बेटी की चिंता और माँ का डर, दोनों ही इतने असली लग रहे थे कि मैं भी उनके साथ रो पड़ी।
पार्किंग में वो अंधेरा और अजनबी का आना, सब कुछ न्याय का भार की तरह सस्पेंस से भरा था। लड़की की आँखों में डर साफ दिख रहा था। ऐसे सीन देखकर लगता है कि ज़िंदगी भी कभी-कभी फिल्म जैसी हो जाती है।
उस किताब में क्या लिखा था जो देखकर उस आदमी का चेहरा बदल गया? न्याय का भार के इस मोड़ ने मुझे हैरान कर दिया। शायद यही वो राज है जो सब कुछ बदल देगा।
अंधेरे में अकेले चलना और फिर अचानक हमला, न्याय का भार का ये सीन रोंगटे खड़े कर देने वाला था। लेकिन उस लड़की की आँखों में डर के बावजूद एक चमक थी, जो बता रही थी कि वो हार नहीं मानेगी।
जब पिता ने मुस्कुराते हुए बेटी से बात की, तो लगा जैसे सब कुछ ठीक हो गया हो। न्याय का भार में ऐसे पल ही तो दिल को सुकून देते हैं। परिवार का प्यार ही सबसे बड़ी ताकत है।
पार्किंग का वो सीन देखकर लग रहा था कि कुछ बुरा होने वाला है। न्याय का भार ने फिर से साबित कर दिया कि वो सस्पेंस बनाने में माहिर है। अजनबी का चेहरा और लड़की की चीख, सब कुछ यादगार था।
माँ की आँखों में बेटी के लिए वो डर, न्याय का भार के इस सीन ने दिल को छू लिया। हर माँ की यही चाहत होती है कि उसका बच्चा सुरक्षित रहे। ये जज़्बात बहुत असली लग रहे थे।
उस कमरे की सजावट और किताबों की महक ने न्याय का भार के इस सीन को और भी खास बना दिया। लग रहा था जैसे कोई पुरानी कहानी फिर से जी उठी हो। ऐसे माहौल में बैठकर कहानी सुनना बहुत अच्छा लगता है।
लड़की के गले पर हाथ और उसकी चीख, न्याय का भार का ये अंत देखकर दिल धक से रह गया। अब जानना है कि आगे क्या होगा। क्या वो बच पाएगी या फिर कुछ और ही होने वाला है?
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