जब वह दुल्हन सफेद पोशाक में चर्च में दाखिल हुई, तो हवा में तनाव साफ महसूस हो रहा था। काले लिबास वाले योद्धा की नजरें उस पर जमी थीं, जैसे कोई पुराना राज खुलने वाला हो। बच्चे की मासूमियत और उस औरत की नफरत भरी आंखें कहानी को और गहरा बना रही हैं। 'मेरा एक्स अल्फा, मेरा फ्यूचर किंग' का यह मोड़ दिलचस्प है।
काले वेलवेट कोट वाला शख्स सिर्फ खड़ा था, लेकिन उसकी मौजूदगी से पूरा हॉल डरा हुआ लग रहा था। उसकी आंखों में दर्द और गुस्सा दोनों थे। जब वह दुल्हन के पास पहुंचा, तो लगा जैसे कोई पुरानी दुश्मनी ताजा हो गई हो। नेटशॉर्ट ऐप पर ऐसे ड्रामे देखना मजा देता है।
सारे बड़े लोग नफरत और बदले की आग में जल रहे थे, लेकिन वह छोटा बच्चा सब कुछ हैरानी से देख रहा था। उसकी आंखों में सवाल थे, जवाब नहीं। शायद यही वजह है कि 'मेरा फ्यूचर किंग' में बच्चों के किरदार इतने अहम होते हैं। वे भविष्य की उम्मीद हैं।
एक दुल्हन सफेद और सुनहरी पोशाक में थी, तो दूसरी काले और बेज रंग के मिश्रण में। दोनों की खूबसूरती अलग थी, लेकिन उनकी नजरों में एक दूसरे के लिए नफरत साफ झलक रही थी। यह टकराव सिर्फ कपड़ों का नहीं, दिलों का था।
जब वह काले चोगे वाला बूढ़ा आदमी चर्च में दाखिल हुआ, तो सबकी सांसें रुक गईं। उसकी आंखों में अनुभव था, और हाथों में ताकत। उसने नीले लिबास वाले शहजादे से हाथ मिलाया, तो लगा जैसे कोई पुराना वादा पूरा हो रहा हो।
नीले वेलवेट के लिबास में वह शहजादा सब कुछ देख रहा था, लेकिन कुछ बोल नहीं रहा था। उसकी चुप्पी सबसे ज्यादा शोर मचा रही थी। शायद वह जानता था कि आगे क्या होने वाला है। 'मेरा एक्स अल्फा' में ऐसे किरदार ही कहानी को आगे बढ़ाते हैं।
काले और बेज रंग की पोशाक वाली औरत की आंखों में इतनी नफरत थी कि लग रहा था जैसे वह दुल्हन को जला देगी। उसका चेहरा गुस्से से तमतमा रहा था। यह सिर्फ जलन नहीं, बदले की आग थी।
चर्च के ऊंचे गुंबद और रंगीन कांच की खिड़कियां सब कुछ देख रही थीं, लेकिन कोई आवाज नहीं थी। सिर्फ कदमों की आहट और सांसों की आवाज थी। यह खामोशी सबसे ज्यादा डरावनी थी। नेटशॉर्ट ऐप पर ऐसे सीन देखकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं।
जब बूढ़े साधु ने शहजादे से हाथ मिलाया, तो लगा जैसे कोई पुराना वादा पूरा हो रहा हो। लेकिन उसकी आंखों में एक चमक थी, जो शक पैदा कर रही थी। क्या यह वादा था या धोखा? 'मेरा फ्यूचर किंग' में ऐसे मोड़ ही तो मजा देते हैं।
जब सब कुछ खत्म होता दिख रहा था, तो असल में सब कुछ शुरू हो रहा था। दुल्हन की आंखों में आंसू थे, योद्धा की आंखों में गुस्सा, और बच्चे की आंखों में सवाल। यह अंत नहीं, एक नई शुरुआत थी।
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