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कथानक सार

Isha, apne pati ko kho kar akeli ho jaati hai. Paisa kamane ke liye woh Thakur Dev ke ghar naukarani banne jaati hai. Dev se ek saal pehle mandir mein mili thi, lekin ab woh use pehchaan leta hai aur baar baar uski sachchai jaanne ki koshish karta hai. Ghar mein doosri naukaraniyaan aur rishtedaar Isha ko pareshan karte hain. Ek din Isha Dev ki jaan bachati hai, tab sach saamne aata hai. Kya Isha aur Dev apna pyaar wapas pa payenge? Kya ghar waale unhe maanenge?
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बूढ़ी माँ का आशीर्वाद

बसंत का झोंका में दादी माँ का चेहरा देखकर लगता है जैसे समय थम गया हो। उनकी आँखों में वो चमक है जो सिर्फ नए जन्म पर ही आती है। जब वो हाथ जोड़कर प्रार्थना करती हैं, तो लगता है पूरा घर पवित्र हो गया। बच्चे को गोद में लेते वक्त उनकी उंगलियों का कांपना दिल को छू लेता है। ये दृश्य इतना भावुक है कि आँखें नम हो जाती हैं।

पति-पत्नी का पल

बसंत का झोंका में जब पति अपनी पत्नी को गले लगाता है, तो लगता है जैसे दुनिया की सारी चिंताएं गायब हो गईं। उनकी आँखों में वो डर और उम्मीद दोनों झलकती है जो नए माता-पिता के चेहरे पर होती है। बच्चे को देखते वक्त उनकी सांसें रुक सी जाती हैं। ये पल इतना खूबसूरत है कि बार-बार देखने को मन करता है।

नन्हें मेहमान का आगमन

बसंत का झोंका में बच्चे की आँखें देखकर लगता है जैसे कोई देवता धरती पर उतर आए हों। उसकी मासूमियत इतनी प्यारी है कि दिल पिघल जाता है। जब वो अपनी माँ की ओर देखता है, तो लगता है जैसे वो सब समझ रहा हो। ये दृश्य इतना कोमल है कि सांस लेने में भी डर लगता है कहीं आवाज़ न हो जाए।

आंसुओं की बारिश

बसंत का झोंका में जब युवती रोती है, तो लगता है जैसे बादल फट पड़े हों। उसके आंसू इतने सच्चे हैं कि देखने वाले की आँखें भी भर आती हैं। जब वो जमीन पर गिरकर रोती है, तो लगता है जैसे उसका दिल टूट गया हो। ये दृश्य इतना दर्दनाक है कि सीने में दर्द होने लगता है।

परिवार का बंधन

बसंत का झोंका में जब पूरा परिवार एक साथ होता है, तो लगता है जैसे कोई पुरानी कहानी जीवंत हो उठी हो। दादी माँ का आशीर्वाद, पति-पत्नी का प्यार, बच्चे की मासूमियत - सब कुछ इतना सही लगता है। ये दृश्य इतना गर्मजोशी भरा है कि दिल में सुकून मिल जाता है।

समय का पहिया

बसंत का झोंका में जब दादी माँ बच्चे को देखती हैं, तो लगता है जैसे समय का पहिया घूम गया हो। उनकी आँखों में वो खुशी है जो सिर्फ नई पीढ़ी को देखकर ही आती है। जब वो बच्चे के हाथ को छूती हैं, तो लगता है जैसे वो अपने बचपन को फिर से जी रही हों। ये पल इतना खास है कि यादों में संजोकर रखना चाहते हैं।

आशा की किरण

बसंत का झोंका में जब युवती रोते हुए भी मुस्कुराती है, तो लगता है जैसे अंधेरे में रोशनी की किरण फूट पड़ी हो। उसके आंसू और मुस्कान का मिलन इतना खूबसूरत है कि दिल को छू लेता है। जब वो बच्चे को देखती है, तो लगता है जैसे उसकी सारी तकलीफें दूर हो गई हों। ये दृश्य इतना उम्मीद भरा है कि मन हल्का हो जाता है।

प्रेम की गहराई

बसंत का झोंका में जब पति अपनी पत्नी के आंसू पोंछता है, तो लगता है जैसे प्रेम की गहराई का अंदाजा हो गया हो। उनकी उंगलियों का स्पर्श इतना कोमल है कि लगता है जैसे कोई फूल छू रहा हो। जब वो उसे गले लगाता है, तो लगता है जैसे वो उसकी सारी तकलीफें अपने ऊपर ले रहा हो। ये पल इतना रोमांटिक है कि दिल धड़कने लगता है।

नई शुरुआत

बसंत का झोंका में जब बच्चा पहली बार अपनी आँखें खोलता है, तो लगता है जैसे दुनिया में नई शुरुआत हो गई हो। उसकी आँखों में वो चमक है जो सिर्फ नए जीवन में ही होती है। जब वो अपनी माँ को देखता है, तो लगता है जैसे वो उसे पहचान रहा हो। ये दृश्य इतना जादुई है कि लगता है जैसे कोई सपना देख रहे हों।

भावनाओं का सागर

बसंत का झोंका में जब सभी पात्र एक साथ होते हैं, तो लगता है जैसे भावनाओं का सागर लहरा रहा हो। दादी माँ का आशीर्वाद, पति-पत्नी का प्यार, बच्चे की मासूमियत, युवती के आंसू - सब कुछ इतना सच्चा लगता है। ये दृश्य इतना भावुक है कि देखने के बाद भी दिल में वो भावनाएं बनी रहती हैं।