इस दृश्य में तनाव इतना गहरा है कि सांस रुक जाती है। सूट पहने शख्स की घबराहट और पुलिस की दृढ़ता का टकराव दिलचस्प है। जब वह बंदूक गिराता है, तो लगता है जैसे वैद्य की मुक्ति का पल आ गया हो। अंत में कार में बैठकर वह शख्स जो सोचता है, वह दर्शकों के मन में सवाल छोड़ जाता है। नेटशॉर्ट ऐप पर ऐसे थ्रिलर देखना एक अलग ही अनुभव है।