काली जैकेट वाले की आँखों में ठंडक और सूट वाले के चेहरे पर डर का मिश्रण देखकर रोंगटे खड़े हो गए। वैद्य की मुक्ति के इस दृश्य में संवाद नहीं, बस नज़रों का युद्ध है जो दिल की धड़कन तेज़ कर देता है। नीली रोशनी और तनावपूर्ण माहौल ने सीन को सिनेमाई बना दिया है। नेटशॉर्ट ऐप पर ऐसे सीन देखना एक अलग ही अनुभव है जो दर्शक को बांधे रखता है।