डॉक्टर की आँखों में वो दर्द देखकर रूह काँप गई! जब वो रात के अंधेरे में कोट उतारकर बदला लेने निकला, तो लगा जैसे वैद्य की मुक्ति का समय आ गया हो। मरीज की आँसू और उस शख्स की चीखें—सब कुछ इतना रियल लगा कि नेटशॉर्ट ऐप पर बैठे-बैठे ही साँसें रुक गईं। ये सिर्फ ड्रामा नहीं, इंसानियत का आईना है।