जब लैपटॉप पर खबर चली कि संदिग्ध आत्महत्या कर चुका है, तो डॉक्टर के चेहरे पर हल्की सी मुस्कान आ गई। फिर फोन आया और उसकी आवाज में घबराहट साफ झलकी। पत्रकारों के सवालों के बीच वह शांत रहने की कोशिश कर रहा है, लेकिन उसकी आंखें सब कुछ बता रही हैं। वैद्य की मुक्ति में यह दृश्य सबसे ज्यादा तनावपूर्ण है। क्या वह सच में निर्दोष है या कुछ छिपा रहा है? हर फ्रेम में संदेह का साया मंडराता है।