इस दृश्य में तनाव इतना गहरा है कि सांस लेना मुश्किल हो जाता है। पिता का गुस्सा और बेटे की बेबसी देखकर दिल दहल जाता है। वैद्य की मुक्ति में ऐसे ही पल होते हैं जो असली जिंदगी की झलक दिखाते हैं। नेटशॉर्ट ऐप पर यह सीन देखकर लगा जैसे मैं भी उस कमरे में खड़ा हूं। भावनाओं का यह तूफान देखकर आंखें नम हो गईं।