ली गाँव के क्लिनिक के बाहर का यह दृश्य बेहद जीवंत है। भीड़ की उत्सुकता और मुख्य पात्रों के बीच का तनाव साफ झलकता है। जब वह आदमी पैसे गिन रहा था, तो लग रहा था कि कुछ बड़ा होने वाला है। रात के खाने का सीन, जहाँ वे साथ में खा रहे हैं, वैद्य की मुक्ति की कहानी में एक सुकून भरा मोड़ लगता है। आतिशबाजी और हँसी-मज़ाक ने माहौल को हल्का कर दिया। यह छोटी-छोटी खुशियाँ ही तो जीवन का असली स्वाद हैं।