इस दृश्य में तनाव इतना गहरा है कि सांस रुक जाती है। एक तरफ अमीर आदमी का घमंड और दूसरी तरफ एक साधारण व्यक्ति की मजबूरी। जब वह कार से उतरता है तो लगता है सब कुछ उसके कब्जे में है, लेकिन ऑफिस के अंदर आते ही माहौल बदल जाता है। वैद्य की मुक्ति की कहानी में यही सबसे दिलचस्प मोड़ है जहां पावर डायनामिक पूरी तरह पलट जाता है। पुलिस की मौजूदगी और उस बूढ़े आदमी की आंखों में आंसू देखकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं। यह सिर्फ एक झगड़ा नहीं, बल्कि इंसानियत की जीत है।