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न्याय

सोनिया मल्होत्रा, जिन्हें कानून की रानी के नाम से जाना जाता है, एक बड़ी लॉयर हैं। वह विधायक लोकेश सिंह के लिए एक केस तैयार कर रही हैं। उधर, उनकी अपनी बेटी दीया और मम्मी रचना को उनकी ही क्लाइंट पूजा सिंह परेशान कर रही है। सोनिया अपनी असली पहचान बताती हैं, लेकिन पूजा को उन पर भरोसा नहीं होता। इसके बजाय, पूजा सोनिया और उनके पूरे परिवार को और भी बुरी तरह से बदतमीज़ी झेलने पर मजबूर कर देती है...
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इस एपिसोड की समीक्षा

सोफिया की बेबसी और गुस्सा

सोफिया का किरदार बहुत शक्तिशाली लग रहा है, भले ही वह जमीन पर गिरी हुई है। उसके चेहरे पर खून है लेकिन आंखों में हार मानने का जज्बा नहीं है। सामने खड़ी लड़की का व्यवहार बहुत आक्रामक है, जो शायद किसी पुरानी दुश्मनी का परिणाम है। न्याय के नाम पर हो रही यह लड़ाई बहुत ही तीव्र है। आसपास खड़े लोग डरे हुए हैं लेकिन कोई मदद को आगे नहीं आ रहा। यह दृश्य दिखाता है कि कैसे एक पल में सब कुछ बदल सकता है। एक्टिंग और डायलॉग डिलीवरी शानदार है।

लाल बालों वाली लड़की का रौद्र रूप

पोल्का डॉट्स वाली ड्रेस पहनी इस लड़की का गुस्सा साफ दिखाई दे रहा है। वह सोफिया को नीचे गिराकर उस पर हावी होने की कोशिश कर रही है। उसने सोफिया का आईडी कार्ड छीन लिया है जो शायद किसी बड़ी साजिश का हिस्सा है। न्याय की इस कहानी में हर किरदार का अपना एक मकसद लग रहा है। रेस्टोरेंट का रेडियो एज स्टाइल सेट डिजाइन इस हिंसक दृश्य के साथ बहुत अच्छा कंट्रास्ट बना रहा है। यह सीन देखकर मन में कई सवाल उठ रहे हैं कि आखिर हुआ क्या है?

डर का माहौल और सहेलियां

पीछे खड़ी काली लड़की और ब्लॉन्ड लड़की के चेहरे पर साफ डर झलक रहा है। वे कुछ बोलना चाहती हैं लेकिन हिम्मत नहीं जुटा पा रही हैं। सोफिया की यह हालत देखकर कोई भी सहम सकता है। न्याय की इस जंग में कमजोर पड़ना मौत को दावत देने जैसा है। जमीन पर बैठी घायल महिला की हालत और भी खराब लग रही है। यह दृश्य बहुत ही इंटेंस है और दर्शकों को सोचने पर मजबूर कर देता है कि अगर वे उस जगह होते तो क्या करते?

आईडी कार्ड का राज

लाल बालों वाली लड़की ने सोफिया से जो कार्ड छीना है, वह शायद इस पूरी कहानी की चाबी है। सोफिया का नाम उस पर साफ लिखा है और वह 'एक्टिव' स्टेटस में है। शायद वह कोई एजेंट या जासूस है जिस पर हमला किया गया है। न्याय की इस कहानी में यह छोटा सा कार्ड बहुत बड़ा रोल प्ले कर सकता है। सोफिया की आंखों में अब भी लड़ने की चिंगारी बाकी है। यह नेटशॉर्ट ऐप का एक ऐसा कंटेंट है जो आपको बार-बार देखने पर मजबूर कर देगा।

चेकर्ड फ्लोर पर खून के निशान

सफेद और काले चेकर्स वाले फर्श पर खून के निशान बहुत ही डरावने लग रहे हैं। यह विजुअल कंट्रास्ट दृश्य को और भी गहरा बना रहा है। सोफिया की सफेद शर्ट पर खून के धब्बे उसकी पीड़ा को बयां कर रहे हैं। न्याय की इस लड़ाई में रंगों का खेल भी बहुत मायने रखता है। लाल रंग का खून, नीली दीवारें और काले-सफेद फर्श का मेल एक अजीब सी बेचैनी पैदा करता है। यह सीन सिनेमेटोग्राफी के लिहाज से बहुत शानदार है।

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