पुलिस वाले उसे पकड़कर ले जा रहे थे और वो बेबसी में चिल्ला रही थी। उसका दर्द साफ दिख रहा था स्क्रीन पर। शायद वो दोषी नहीं है, बस गलत जगह फंस गई है। न्याय की इस दौड़ में अक्सर मासूम लोग पिचक जाते हैं। उसकी आंखों में आंसू देखकर दिल पसीज गया, काश कोई उसकी मदद कर पाता।
अस्पताल के बाद सीन बदलता है और हम देखते हैं कि कैसे मीडिया एक नई कहानी गढ़ रही है। लाल ड्रेस वाली महिला अब प्रेस के सामने खड़ी है, बिल्कुल शांत। क्या ये वही महिला है जो पहले रो रही थी? या ये सब एक नाटक है? न्याय शो में दिखाया गया ये ट्विस्ट दिमाग घुमा देने वाला है। सच क्या है, ये जानने के लिए मैं बेताब हूं।
शुरुआत में वो बहुत शांत लग रही थी, लेकिन जैसे-जैसे प्लॉट आगे बढ़ा, उसके चेहरे के भाव बदलने लगे। जब उसने घायल लड़की को गले लगाया, तो लगा जैसे वो उसकी मां हो या कोई बहुत करीबी। न्याय की इस कहानी में उसके किरदार की गहराई सबसे ज्यादा है। उसकी मुस्कान के पीछे छिपा दर्द कोई नहीं देख सकता।
सिर पर पट्टी बांधे वो लड़की जब मुस्कुराई, तो पूरा माहौल बदल गया। उसकी मासूमियत ने सबका दिल जीत लिया। शायद वो ही इस कहानी की असली हीरोइन है जिसने सब कुछ देखा है। न्याय की तलाश में वो अकेली नहीं है, उसके साथ वो महिला भी है जो उसे गले लगाकर रो पड़ी। ये सीन बहुत इमोशनल था।
उसका गुस्सा सिर्फ एक्टिंग नहीं लग रहा था, बिल्कुल असली लग रहा था। शायद उसे लगता है कि उसके साथ अन्याय हुआ है। पर जब पुलिस वाले उसे घेर लेते हैं, तो उसकी बेबसी साफ दिखती है। न्याय की इस कहानी में हर कोई किसी न किसी तरह से पीड़ित लगता है। कौन सही है और कौन गलत, ये पता लगाना मुश्किल है।