जो अपना था, वही दुश्मन निकला
बारिश की रात, खून से सना शादी का गाउन, और सड़कों पर भागती हुई अन्वी। वह अपनी ही शादी से बचकर भाग रही है, जहाँ उसकी जान ली जानी थी। दोषी है उसका मंगेतर रजत और उसकी सबसे अच्छी सहेली तन्वी। उन्होंने अन्वी को पागल करार दे दिया, जबरदस्ती दवा पिलाई, और उसे मानसिक अस्पताल में बंद करके उसकी ही ज़िंदगी जीने की प्लान बना ली। तीन साल का झूठा प्यार। एक सुनियोजित साजिश। अब अन्वी को सच्चाई पता चल चुकी है। लेकिन क्या वह इन तीनों को हरा पाएगी? क्या वह अपना नाम, अपनी पहचान और अपनी ज़िंदगी वापस छीन पाएगी?