मेज पर पड़ा खाना और हाथों में पकड़ी तलवारें – ये विरोधाभास ही इस सीन की जान है। वो बड़ा वाला गुंडा जो हंस रहा है, उसे पता नहीं कि उसकी हंसी कब आंसुओं में बदल जाएगी। नेटशॉर्ट ऐप पर ऐसे सीन देखने का मजा ही अलग है, बिल्कुल सिनेमा हॉल जैसा अनुभव।
जब वो काले लिबास वाला शख्स आगे बढ़ता है, तो पूरा माहौल बदल जाता है। उसकी चाल में जो आत्मविश्वास है, वो बताता है कि वो अकेले ही पूरी भीड़ को संभाल सकता है। समय-यात्रा, विनाशकारी शुरुआत के बाद ऐसा लग रहा था कि अब कहानी में नया मोड़ आएगा। बस यही उम्मीद है कि अगला एपिसोड जल्दी आए।
उन गुंडों की हंसी देखकर लग रहा था कि ये लोग अपनी मौत को निमंत्रण दे रहे हैं। जब हीरो ने वो अजीब सा हथियार निकाला, तो सबके चेहरे के रंग उड़ गए। ये पल किसी थ्रिलर फिल्म से कम नहीं था। डायरेक्शन और एक्टिंग दोनों ही लाजवाब हैं।
रात का अंधेरा, मशालों की रोशनी और तलवारों की चमक – ये सब मिलकर एक डरावना माहौल बना रहे हैं। वो सीढ़ियां जहां सब खड़े हैं, वो जैसे मौत का मंच लग रही हैं। समय-यात्रा, विनाशकारी शुरुआत वाले पल में दिल की धड़कनें तेज हो गई थीं। ऐसे सीन बार-बार देखने को जी करता है।
दोनों तरफ खड़े लोग एक-दूसरे को घूर रहे हैं, जैसे शेर और भेड़िए आमने-सामने हों। वो जो बीच में बैठा है, उसकी हंसी में एक अजीब सा घमंड है जो उसे महंगा पड़ने वाला है। कहानी की रफ्तार बहुत तेज है और हर सेकंड कुछ नया हो रहा है।