PreviousLater
Close

रणभूमि की रानी

अराजक गणराज्य काल में चन्द्रावती संघ की प्रमुख बबिता राठौड़ विश्वासघात का शिकार होकर भी साहस से उभरती है। राघव मेहता और सोनल चौहान की साज़िशों का सामना करते हुए वह अपने पिता वीरेंद्र सिंह राठौड़ से मिलती है। विक्रम राठौड़ और शत्रु शक्तियों के षड्यंत्रों का पर्दाफाश कर, वह राजेश्वरी देवी के साथ मिलकर चन्द्रावती संघ को पुनर्जीवित करती है और अंततः सेनापति बनकर राष्ट्र की रक्षा करती है।
  • Instagram
सुझाव

इस एपिसोड की समीक्षा

नवीनतम

बबिता का कमाल का एक्शन

बबिता राठौड़ की तलवारबाजी और हुनर देखकर मैं दंग रह गया। उसने अपने छाते से निकलने वाले हथियारों से रोनिन सरदार को बुरी तरह धूल चटा दी। बर्फ़ीली गली में यह लड़ाई का दृश्य किसी बड़ी फिल्म से कम नहीं लग रहा था। रणभूमि की रानी में ऐसे ही शानदार डायलॉगबाजी और मारपीट का तड़का देखने को मिल रहा है। कप्तान मोहन शर्मा की जान बचाने का उसका तरीका काफी अनोखा और प्रभावशाली था।

राघव की बेवफाई

राघव मेहता का किसी दूसरी लड़की के साथ आना बबिता के लिए बहुत बड़ा झटका था। सोनल चौहान का आना पूरे घर का माहौल खराब कर दिया है। नेहा मेहता तो पहले से ही बबिता को बिल्कुल पसंद नहीं करती थी। सुशीला मेहता बीच में आकर शांति बनाने की कोशिश कर रही हैं। इस शो रणभूमि की रानी में रिश्तों की यह जंग देखने लायक है।

सुनहरे लॉकेट का राज

वीरेंद्र सिंह राठौड़ के हाथ में वो सुनहरा लॉकेट क्या बड़ा राज छिपाए हुए है। बबिता की असली पहचान अब धीरे-धीरे सामने आ रही है। जब वो सबूत देखकर चौंक जाती है तो लगता है कोई बड़ा खुलासा होने वाला है। सेनापति भवन का दृश्य बहुत भव्य और शानदार लगा। रणभूमि की रानी की कहानी में अब तक का सबसे बड़ा मोड़ यह हो सकता है।

बर्फ़ीली शाम का नज़ारा

बर्फ़ गिरने का मौसम और पुरानी गलियों का नज़ारा बहुत सुंदर और रोमांटिक था। बबिता राठौड़ का साड़ी और ऊनी शॉल में लुक कमाल का लग रहा था। उसने सब्जी की टोकरी में खून का निशान देखकर जो प्रतिक्रिया दी वह लाजवाब था। रणभूमि की रानी में सिर्फ लड़ाई नहीं बल्कि भावनाएं भी बहुत गहरी दिखाई गई हैं। हर फ्रेम को देखकर मज़ा आ रहा है।

निंजा का सलाम

दो निंजा वाम दूत और दक्षिण दूत का बबिता को सलाम करना हैरान करने वाला था। लगता है वो कोई साधारण गृहिणी नहीं बल्कि किसी बड़ी ताकत की मालिक हैं। राघव मेहता को अभी तक इस बात का पता नहीं चला है। जब उसे सच पता चलेगा तो क्या होगा यह देखने के लिए बेताब हूं। रणभूमि की रानी की हर कड़ी नया रहस्य लेकर आती है।

घर की राजनीति

नेहा मेहता का बबिता पर चिल्लाना और थप्पड़ मारना बहुत बुरा लगा। सुशीला मेहता ने समझदारी दिखाकर मामले को संभाला। घर के अंदर की यह राजनीति बाहर की लड़ाई से कम नहीं है। बबिता चुपचाप सब सह रही है लेकिन उसकी आंखों में गुस्सा साफ दिख रहा था। रणभूमि की रानी में महिला किरदारों को बहुत मजबूती से दिखाया गया है।

प्रेम त्रिकोण की शुरुआत

राघव मेहता की वर्दी में शख्सियत बहुत जच रही थी लेकिन उसकी वफादारी पर शक होने लगा है। सोनल चौहान की पोशाक और अंदाज बहुत अमीराना था। बबिता का चेहरा देखकर लग रहा था जैसे दिल टूट गया हो। क्या राघव को बबिता की असली ताकत का पता है। रणभूमि की रानी में यह प्रेम त्रिकोण बहुत दिलचस्प होने वाला है।

खामोश योद्धा

रोनिन सरदार के गिरने के बाद बबिता का शांत खड़े रहना कातिलाना था। उसने बिना किसी डर के दुश्मनों का सामना किया। कप्तान मोहन शर्मा की जान बचाने के बाद भी वो चुपचाप चली गई। यह रहस्यमयी अंदाज दर्शकों को बहुत पसंद आ रहा है। रणभूमि की रानी में हीरोइन का ऐसा रूप पहले कभी नहीं देखा।

रसोई का संघर्ष

खाने की मेज पर हुई बहस ने घर का माहौल तनावपूर्ण कर दिया। बबिता ने रसोई में काम किया लेकिन उसे इज्जत नहीं मिली। नेहा मेहता की जलन साफ झलक रही थी। सुशीला मेहता के आने ने थोड़ी राहत दी। रणभूमि की रानी में परिवार के अंदरूनी झगड़े भी बहुत गहराई से दिखाए गए हैं।

पुरानी कार और नया मोड़

पुरानी कार और उससे उतरते हुए राघव मेहता का अंदाज पुराने जमाने का था। लेकिन सोनल चौहान का हाथ थामना बबिता के लिए तकलीफदेह था। यह कहानी आगे कैसे मुड़ती है यह देखना बाकी है। वीरेंद्र सिंह राठौड़ का किरदार भी बहुत प्रभावशाली लग रहा है। रणभूमि की रानी की कहानी बहुत ही अनोखी और रोचक है।