हालांकि यह एक फंटेसी सीरीज है, लेकिन स्कूल का सेटअप, यूनिफॉर्म और छात्रों की भीड़ बहुत रियलिस्टिक लग रही थी। सूरज की रोशनी और चेरी ब्लॉसम के पेड़ सीन को और भी खूबसूरत बना रहे थे। पशु-साथी: सब विकसित हों, मैं आदिम बनूँ में विजुअल एस्थेटिक्स पर बहुत ध्यान दिया गया है। ऐसे डिटेल्स दर्शकों को कहानी में डुबो देते हैं।
काले बालों वाले लड़के का हवा में उड़कर हमला करना और फिर जमीन पर लैंड करना बहुत स्मूथ था। एनिमेशन में फ्लूइडिटी और इम्पैक्ट दोनों परफेक्ट थे। पशु-साथी: सब विकसित हों, मैं आदिम बनूँ के एक्शन सीन्स में जान है, सिर्फ धमाके नहीं। पीले कोट वाले का बिना हिले खड़ा रहना और फिर भी जीतना दिखाता है कि असली पावर दिखावे में नहीं, अंदर होती है।
अब जब काले बालों वाला लड़का पीले कोट वाले के सामने खड़ा है, तो सवाल यह है कि क्या वह उसे हरा पाएगा? या फिर यह सिर्फ एक टेस्ट था? पशु-साथी: सब विकसित हों, मैं आदिम बनूँ की कहानी में हर एपिसोड के बाद नए सवाल खड़े हो जाते हैं। सफेद बालों वाले लड़के का क्या होगा, यह भी जानने को उत्सुक हूं। नेटशॉर्ट ऐप पर ऐसे सीरीज देखना बहुत एंगेजिंग लगता है।
जैसे ही पीले कोट वाला किरदार स्टेज पर आया, माहौल पूरी तरह बदल गया। उसकी आंखों में जो आत्मविश्वास था, वह सच में डरावना था। काले बालों वाले लड़के के साथ उसकी टक्कर देखकर रोंगटे खड़े हो गए। पशु-साथी: सब विकसित हों, मैं आदिम बनूँ की कहानी में पावर डायनामिक्स बहुत दिलचस्प तरीके से दिखाए गए हैं। हर फ्रेम में तनाव और एक्शन का बेहतरीन मिश्रण है।
इस वीडियो में सिर्फ मुख्य किरदार ही नहीं, बल्कि आसपास खड़े छात्रों के चेहरे के भाव भी बहुत एक्सप्रेसिव हैं। जब जादू चलता है तो उनकी आंखें फैल जाती हैं, और जब फाइट शुरू होती है तो वे सहम जाते हैं। पशु-साथी: सब विकसित हों, मैं आदिम बनूँ में ऐसे डिटेल्स पर ध्यान देना दिखाता है कि मेकर्स कितने परफेक्शनिस्ट हैं। बैकग्राउंड म्यूजिक भी सीन के मूड के साथ परफेक्टली सिंक है।