लाल ऊर्जा से घिरा वह विशाल राक्षस जब मैदान में कूदा, तो जमीन तक हिल गई। लेकिन जब सामने सुनहरा शेर आया, जिसके पंखों से आग की लपटें निकल रही थीं, तो मुकाबला और भी रोचक हो गया। शेर की दहाड़ और राक्षस की चीखें—दोनों के बीच की टक्कर ने दिल की धड़कनें तेज कर दीं। पशु-साथी: सब विकसित हों, मैं आदिम बनूँ में ऐसे एक्शन सीन्स देखकर लगता है कि हर पल कुछ नया होने वाला है।
जब वह सफेद बालों वाला लड़का आगे बढ़ा, तो पीछे खड़ी भीड़ के चेहरे पर अलग-अलग भाव थे—कुछ डरे हुए, कुछ हैरान, तो कुछ उत्सुक। खासकर वो दो लड़के जो आपस में फुसफुसा रहे थे, उनकी हरकतें देखकर लगता था कि वे कुछ छुपा रहे हैं। पशु-साथी: सब विकसित हों, मैं आदिम बनूँ में ऐसे छोटे-छोटे डिटेल्स कहानी को और भी जीवंत बना देते हैं।
उसकी मुस्कान में एक अजीब सा आकर्षण था—जैसे वह सब कुछ जानता हो जो होने वाला है। जब उसने उंगली उठाई और आसमान से सुनहरे शेर को बुलाया, तो उसकी आँखों में एक चमक थी जो बता रही थी कि वह जीतने वाला है। पशु-साथी: सब विकसित हों, मैं आदिम बनूँ में ऐसे किरदार देखकर लगता है कि कहानी में अभी बहुत कुछ बाकी है।
जब सुनहरे शेर ने आग की गोली मारी और राक्षस हवा में उड़कर जमीन पर गिरा, तो उसका चीखना और फिर बेहोश हो जाना देखकर थोड़ा दुख हुआ। वह राक्षस भी तो किसी का साथी रहा होगा? पशु-साथी: सब विकसित हों, मैं आदिम बनूँ में ऐसे पल दिखाते हैं कि हर किरदार की अपनी कहानी होती है, चाहे वह हीरो हो या विलेन।
वह गोलाकार मैदान जिस पर जादूई निशान बने थे, देखने में बहुत ही शानदार लग रहा था। जब सुनहरे शेर और लाल राक्षस के बीच लड़ाई हुई, तो उस मैदान की चमक और भी बढ़ गई। पशु-साथी: सब विकसित हों, मैं आदिम बनूँ में ऐसे सेट डिजाइन कहानी को एक अलग ही दुनिया में ले जाते हैं।