अंत में हीरो का मुस्कुराना और विजयी मुद्रा में खड़ा होना दिल को छू गया। पशु साथी: सब विकसित हों, मैं आदिम बनूँ ने साबित कर दिया कि मेहनत और हुनर के आगे कोई भी मुश्किल बड़ी नहीं होती। नेटशॉर्ट पर यह एपिसोड देखकर बहुत अच्छा लगा। अब अगले एपिसोड का बेसब्री से इंतजार है।
शुरुआत में जो पात्र साधारण लग रहा था, उसने अंत में सबकी बोलती बंद कर दी। पशु साथी: सब विकसित हों, मैं आदिम बनूँ में पावर स्केल का यह उतार-चढ़ाव बहुत रोमांचक है। जब उसने ड्रैगन की पीठ पर खड़े होकर विजयी मुद्रा बनाई, तो थिएटर में सीटी बजने जैसा अहसास हुआ। यह पल किसी भी फैंटेसी प्रेमी के लिए यादगार है।
विलेन का घमंड टूटते देखने में जो मजा आया, वह शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। पशु साथी: सब विकसित हों, मैं आदिम बनूँ की कहानी हमें बताती है कि अहंकार हमेशा पतन का कारण बनता है। उसका चेहरा जब डर से विकृत हुआ, तो लगा कि न्याय हो गया। एनिमेशन की क्वालिटी ने इस भावना को और भी गहरा कर दिया।
रंग-बिरंगे क्रिस्टल और लावा नदियों से भरी यह गुफा किसी सपने जैसी लगती है। पशु साथी: सब विकसित हों, मैं आदिम बनूँ के आर्ट डिपार्टमेंट ने कमाल कर दिया है। हर फ्रेम एक पेंटिंग जैसा है। जब पात्र इन रास्तों से दौड़ रहे थे, तो लगा जैसे हम भी उनके साथ उस खतरनाक लेकिन खूबसूरत दुनिया में हैं।
जब लावा राक्षस ने हमला किया, तो कछुए का अपने खोल में छिप जाना और फिर पलटवार करना बहुत स्मार्ट था। पशु साथी: सब विकसित हों, मैं आदिम बनूँ में हर बीस्ट की अपनी खासियत है। यह सीन दिखाता है कि सिर्फ ताकत नहीं, बल्कि रणनीति भी जीत दिलाती है। बचाव की यह तकनीक बहुत प्रभावशाली थी।