उस काले भालू की लाल आंखें और विशाल पंजे देखकर रोंगटे खड़े हो गए। जब उसने शेर को मारा, तो स्क्रीन पर सन्नाटा छा गया। लड़के की चीख और डर इतना असली लगा कि मैं भी वहीं महसूस करने लगा। पशु साथी: सब विकसित हों, मैं आदिम बनूँ में एक्शन और इमोशन का बेहतरीन मिश्रण है। नेटशॉर्ट ऐप पर ऐसे सीन देखना एक अलग ही अनुभव है।
जब वह लड़की रोते हुए उस लड़के के पास पहुंची, तो उसकी आंखों में बेबसी साफ दिख रही थी। उसने मदद मांगी, लेकिन सामने वाला शांत खड़ा रहा। यह उदासीनता देखकर गुस्सा आया। पशु साथी: सब विकसित हों, मैं आदिम बनूँ में पात्रों के बीच के रिश्ते बहुत गहरे हैं। हर किसी का दर्द अलग है, और यही इस कहानी की खूबसूरती है।
वह लड़का जिसने कुछ नहीं कहा, बस शांत खड़ा रहा। उसकी आंखों में एक अजीब सी चमक थी, जैसे वह सब कुछ जानता हो। क्या वह मदद कर सकता था? या फिर उसके पास कोई और योजना थी? पशु साथी: सब विकसित हों, मैं आदिम बनूँ में ऐसे किरदार कहानी को और भी दिलचस्प बनाते हैं। उसकी चुप्पी सबसे ज्यादा शोर मचा रही थी।
एक इंसान और शेर के बीच का यह रिश्ता देखकर दिल पिघल गया। शेर ने अपनी जान देकर अपने साथी को बचाया। यह वफादारी आज के दौर में कम ही देखने को मिलती है। पशु साथी: सब विकसित हों, मैं आदिम बनूँ में जानवरों के जज्बातों को बहुत खूबसूरती से दिखाया गया है। नेटशॉर्ट पर यह सीरीज जरूर देखनी चाहिए।
काले बादल, सूखे पेड़ और टूटी हुई जमीन - यह माहौल पूरी कहानी के दर्द को बयां कर रहा था। हर फ्रेम में एक उदासी और डर था। पशु साथी: सब विकसित हों, मैं आदिम बनूँ की विजुअल्स इतनी शक्तिशाली हैं कि बिना डायलॉग के ही सब कुछ समझ आ जाता है। ऐसे सीन देखकर लगता है कि जंगल भी रो रहा है।