रीना मेहरा का साहस देखकर दंग रह गए। अमित शर्मा को लगा था कि वो डर जाएंगी, लेकिन उन्होंने इस्तीफा देकर सबको चौंका दिया। कार्यालय की राजनीति कितनी गंदी होती है, यह नौकरी गई, कंपनी ली में साफ दिखता है। रीना की आंखों में दर्द साफ झलक रहा था जब वो खड़ी हुई। काश हर कर्मचारी इतनी हिम्मत दिखा पाए। विककी यादव बस चाय पीते रहे, मानो कुछ हुआ ही नहीं। यह दृश्य दिल को छू गया।
अमित शर्मा का गुस्सा देखकर लगता है कि वो सच में मालिक हैं। बैठक कक्ष का माहौल इतना तनावपूर्ण था कि सांस रुक जाए। नीलम कपूर की एंट्री ने कहानी में नया मोड़ दे दिया। नौकरी गई, कंपनी ली की कहानी हर कर्मचारी की कहानी लगती है। सत्ता के संतुलन को बहुत बारीकी से दिखाया गया है। अमित के अभिनय ने इस कहानी को अगले स्तर पर पहुंचा दिया है। देखने वाला हर पल बंधा रहता है।
विककी यादव का किरदार बहुत मजेदार है। सब लोग चिल्ला रहे हैं और ये चुपचाप चाय पी रहे हैं। शायद वो जानते हैं कि अंत क्या होने वाला है। नौकरी गई, कंपनी ली में हर किरदार की अपनी अहमियत है। रीना मेहरा के चेहरे के भाव बता रहे हैं कि वो हार नहीं मानने वाली। कार्यालय के झगड़े कभी कितने बड़े रूप ले लेते हैं। यह शो देखकर अपने मालिक की याद आ गई।
इस्तीफे का कागज जब मेज पर रखा गया, तो सन्नाटा छा गया। अमित शर्मा की आंखें फटी की फटी रह गईं। रीना मेहरा ने साबित कर दिया कि वो किसी की मोहताज नहीं। नौकरी गई, कंपनी ली का यह कड़ी सबसे बेहतरीन है। नीलम कपूर की मुस्कान के पीछे कोई बड़ा खेल छिपा है। मुझे लगता है कि वो रीना की जगह लेना चाहती है। कहानी में बहुत मोड़ हैं।
कॉर्पोरेट दुनिया की सच्चाई इस शो में बेनकाब हुई है। अमित शर्मा जैसे मालिक हर दफ्तर में मिल जाते हैं। रीना मेहरा ने अपनी इज्जत की लड़ाई लड़ी है। नौकरी गई, कंपनी ली देखकर लगता है कि यह सिर्फ नाटक नहीं हकीकत है। विककी यादव का प्रतिक्रिया देखने लायक था। जब सब हैरान थे, वो शांत थे। निर्देशन और अभिनय दोनों ही शानदार हैं। हर दृश्य में कुछ नया है।
नीलम कपूर का व्यक्तित्व बहुत रहस्यमयी लग रहा है। वो रीना मेहरा से दोस्ती दिखा रही हैं, लेकिन दिल में कुछ और है। अमित शर्मा को अपनी गलती का अहसास हो रहा है। नौकरी गई, कंपनी ली की पटकथा बहुत मजबूत है। बैठक कक्ष की रोशनी भी माहौल के हिसाब से बदलती है। जब रीना खड़ी हुई तो लग रहा था कि वो राजा वापस आ गया हो। बहुत प्रभावशाली दृश्य है।
इस शो में भावनात्मक नाटक बहुत है। रीना मेहरा की आवाज में कांप थी जब वो बोल रही थी। अमित शर्मा ने जोर से मेज पीटी, गुस्सा साफ दिख रहा था। नौकरी गई, कंपनी ली में हर किरदार ने जान डाल दी है। विककी यादव की चाय वाली आदत मुझे बहुत पसंद आई। यह छोटी चीजें किरदार को गहराई देती हैं। मैं अगली कड़ी देखने के लिए बेताब हूं।
कार्यालय की राजनीति कितनी खतरनाक हो सकती है, यह नौकरी गई, कंपनी ली में दिखाया गया है। नीलम कपूर ने नई सदस्य बनकर सबकी नींद उड़ा दी। अमित शर्मा को लगा था कि सब उनके काबू में है। रीना मेहरा ने खेल पलट दिया। यह शो नेटशॉर्ट पर देखने में बहुत मजा आ रहा है। गुणवत्ता भी बहुत अच्छी है। हर दृश्य के बाद कुछ नया होता है।
अमित शर्मा का रवैया शुरू में बहुत घमंडी था। लेकिन जब रीना मेहरा ने इस्तीफा दिया, तो वो हिल गए। नौकरी गई, कंपनी ली की कहानी बहुत असली लगने वाली है। विककी यादव जैसे कर्मचारी हर कार्यालय में होते हैं। वो बस तमाशा देखते हैं। नीलम कपूर की एंट्री से कहानी में जान आ गई। मुझे यह कहानी बहुत पसंद आ रही है। हर पल रहस्य बना रहता है।
अंत में रीना मेहरा का चेहरा देखकर लग रहा था कि वो जीत गई हैं। अमित शर्मा चुपचाप बैठे रहे, कुछ बोल नहीं पाए। नौकरी गई, कंपनी ली का यह अंत बहुत दमदार है। नीलम कपूर की मुस्कान अब डरावनी लग रही है। शायद वो अगली खलनायक है। विककी यादव ने भी अपनी भूमिका अच्छे से निभाया। यह शो व्यापार दुनिया का सच दिखाता है। बहुत शानदार निर्माण है।
इस एपिसोड की समीक्षा
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